Monday, December 2, 2013

दुनिया के संत महत्मावों को उनके कथित शिष्यों/ भक्तों ने बदनाम किया


"जय गुरु देव" इतिहास गवाह है कि दुनिया के संत महत्मावों को उनके कथित शिष्यों/ भक्तों ने बदनाम किया और उनके खिलाफ साजिशे करके उन्हें मरवाकर उनके आश्रम की संपत्ति को हड़प लिया, ऐसा ही कुछ वाकया जय गुरु देव आशाराम मथुरा का भी है. जय गुरु देव आश्रम मथुरा पे विवाद का असल मुद्दा माल (संपत्ति) की लूट का है. आश्रम पे काबिज गुंडा- पंकज यादव तो शिवपाल यादव(सपा) का एजेंट (दलाल) है, दूसरा उमाकांत तिवारी महालुटेरा, महाचोर, साजिशकर्ताओं, गुरुद्रोहिओं का महागुरु व् खान्ग्रेस का दलाल है. दोनों महाधूर्त व् मक्कार एवं गुरुद्रोही हैं, दोनों में से किसी के बहकावे में नहीं आना है. इनमे से किसी का भी साथ देना महा पाप व् गुरु महाराज के साथ घात / दगा है. जब शराब, सबाब, कबाब/ मांस, व् पैसे पे अपना इमां-धर्म बेचकर देश्द्रोहियों, भ्रष्टाचारियों को लोग वोट करना बंद नहीं करेंगे तो क्या होगा ? उसका रिजल्ट भी तो भुगतना ही पड़ेगा. "लम्हों ने खता की सदियों ने सजा पायी" क्षणिक प्रभाव में आकर भावनावों के आवेग में लोग गलतियां कर बैठते हैं और बाद में हमेशा २ के लिए पछताना पड़ता है. ------डॉ. विक्रम देव शर्मा , गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता एवं एसोसिएट प्रोफेसर, प्रबंध संकाय, पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर संपर्क सूत्र - ९९१९८८३५३३

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